ㅤㅤएक अमीर आदमी था l उसके कई सारे दोस्त थे, उसमे एक दोस्त जो काफी गरीब था, वह अमीर आदमी का विश्वास पाञ था l एक दिन अमीर आदमी अपने घर सभी दोस्तो को खाने का आमंञण देता है, सभी मिञ अमीर आदमी के घर आते है l भोजन के बाद अमीर आदमी को ख्याल आता है कि उसने एक उंगली मे कीमती हीरे जडित अंगुठी पहनी हुई थी,थोडी ढीली होने के कारण कही गिर गई है l सभी मिञ घर मे अंगुठी खोजने मे मदद करते है l लेकिन नही मिलती l
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ㅤㅤएक मिञ कहता है :ㅤㅤआप हम सभी की तलाशी ले सकते है l एक आदमी की वजह से हम सभी हमेशा के लिए आप की नजर मे शक के दायरे मे रहेगे.
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ㅤㅤसभी मिञ तलाशी के लिये तैय्यार हो जाते है l सिवाए एक गरीब मिञ के वो अपनी तलाशी लेने से मना कर देता है, सभी मिञ उसका अपमान करते है l अमीर आदमी किसी की तलाशी ना लेकर सभी को विदा करता है l दूसरे दिन सुबह जब अमीर आदमी अपने कोट की जेब में हाथ डालता है तो अंगुठी मिल जाती है और वो सीधा गरीब मिञ के घर आता है और अपने मिञो द्वारा किये अपमान की माफी मागता है और अपनी तलाशी ना देने की वजह पुछता है
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ㅤㅤगरीब मिञ पलंग पर सोये हुये अपने बिमार पुञ की ओर इशारा करते हुए कहता है :ㅤㅤमै जब आपके यहा आ रहा था , इस ने मिठ्ठाई खाने की जिद की थी, आप के यहा जब खाना खा रहा था तो मिठ्ठाई दिखी तो मैने वो न खाकर अपने पुञ के लिये जेब मे रख ली थी | अगर तलाशी ली जाती तो अंगुठी की ना सही मिठ्ठाई चोरी का इल्जाम जरूर लगता इसी लिये अपमान सहना बेहतर समझा क्योकी रात को सच बताता तो बीच मे बेटे का नाम
भी आता.
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इस कहानी से साबित होता है माता-पिता अपनी औलाद की छोटी-छोटी खुशी के लिये क्या- क्या नही सहन करते
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ㅤㅤएक मिञ कहता है :ㅤㅤआप हम सभी की तलाशी ले सकते है l एक आदमी की वजह से हम सभी हमेशा के लिए आप की नजर मे शक के दायरे मे रहेगे.
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ㅤㅤसभी मिञ तलाशी के लिये तैय्यार हो जाते है l सिवाए एक गरीब मिञ के वो अपनी तलाशी लेने से मना कर देता है, सभी मिञ उसका अपमान करते है l अमीर आदमी किसी की तलाशी ना लेकर सभी को विदा करता है l दूसरे दिन सुबह जब अमीर आदमी अपने कोट की जेब में हाथ डालता है तो अंगुठी मिल जाती है और वो सीधा गरीब मिञ के घर आता है और अपने मिञो द्वारा किये अपमान की माफी मागता है और अपनी तलाशी ना देने की वजह पुछता है
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ㅤㅤगरीब मिञ पलंग पर सोये हुये अपने बिमार पुञ की ओर इशारा करते हुए कहता है :ㅤㅤमै जब आपके यहा आ रहा था , इस ने मिठ्ठाई खाने की जिद की थी, आप के यहा जब खाना खा रहा था तो मिठ्ठाई दिखी तो मैने वो न खाकर अपने पुञ के लिये जेब मे रख ली थी | अगर तलाशी ली जाती तो अंगुठी की ना सही मिठ्ठाई चोरी का इल्जाम जरूर लगता इसी लिये अपमान सहना बेहतर समझा क्योकी रात को सच बताता तो बीच मे बेटे का नाम
भी आता.
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इस कहानी से साबित होता है माता-पिता अपनी औलाद की छोटी-छोटी खुशी के लिये क्या- क्या नही सहन करते
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