_/\_ एक विदेशी सूली पर चढ़ा और तुम लोग लग गए मेरी क्रिसमस मेरी क्रिसमस करने को ! अरे तुम्हारे बाप-दादाओँ की जान बचाने को जो ये दो बच्चे शहीद हुए थे उनका क्या ? _/\_
_/\_ गुरु गोविन्द सिँह जी के दो बेटे बाबा फतेह सिँह और बाबा जोरावर सिँह को जिँदा दीवार मेँ चुनवा दिया गया था । सिर्फ इसलिए कि उन्होने अपने धर्म का परित्याग करके इस्लाम कबूल नहीँ किया था ? सारे सेक्यूलर ठुल्लोँ को याद है कि आज के दिन ईसामसीह को सूली पर टाँगा गया था लेकिन २१ दिसम्बर १७६१को इन दो वीर सपूतोँ ने अपने प्राणोँ की परवाह न करते हुए अपने देश और धर्म के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया वो भूल गए ? उनका शहीदी दिवस भूल गए ? _/\_
_/\_ गुरु गोविन्द सिँह जी के दो बेटे बाबा फतेह सिँह और बाबा जोरावर सिँह को जिँदा दीवार मेँ चुनवा दिया गया था । सिर्फ इसलिए कि उन्होने अपने धर्म का परित्याग करके इस्लाम कबूल नहीँ किया था ? सारे सेक्यूलर ठुल्लोँ को याद है कि आज के दिन ईसामसीह को सूली पर टाँगा गया था लेकिन २१ दिसम्बर १७६१को इन दो वीर सपूतोँ ने अपने प्राणोँ की परवाह न करते हुए अपने देश और धर्म के लिए सर्वोच्च बलिदान दिया वो भूल गए ? उनका शहीदी दिवस भूल गए ? _/\_
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